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        <title>परमेश्वर की धार्मिकता जो रोमियों में प्रगट हुई - हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना ( I )</title>
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        <description>पानी और आत्मा का सुसमाचार परमेश्वर की धार्मिकता है! इस किताब के शब्द आपके हृदय की प्यास बुझाएँगे। आज के मसीही हरदिन जो पाप करते है उसके सच्चे समाधान को जाने बिना वे अपना जीवन जीते है। क्या आप जानते है की परमेश्वर की धार्मिकता क्या है? मैं आशा करता हूँ की आप खुद से यह प्रश्न पुछेंगे और परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करेंगे, जो इस किताब में प्रगट की गई है।
परमेश्वर की धार्मिकता पानी और आत्मा के सुसमाचार से है। फिर भी, मूल्यवान खजाने के जैसे उसे धार्मिक चेलों की नज़र से लम्बे समय से छूपा के रखा है। परिणाम के तौर पर, कई लोग परमेश्वर की धार्मिकता की जगह अपनी धार्मिकता पर निर्भर रहते है और अभिमान करते है। हालाँकि, मसीही सिध्धांत विश्वासियों के हृदय में मुख्य बात बने ऐसा नहीं लगता, जैसे की इस सिध्धांतो में परमेश्वर की धार्मिकता है।
पूर्वनिर्धारणा, न्याय और क्रमिक पवित्रता के सिध्धांत मसीहियत के मुख्य सिध्धांत है, जो विश्वासियों के जीवन में परेशानी और खालीपन भर देते है। लेकिन अब, मसीहियों को परमेश्वर को जानना चाहिए, उनकी धार्मिकता के बारे में सीखना चाहिए और निश्चित विश्वास में आगे बढ़ना चाहिए।
“हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना” आपको उत्तम समझ का आत्मा देगा और शांति की ओर आपको लेजर जाएगा। लेखक यह इच्छा रखते है की आप परमेश्वर की धार्मिकता को पहिचानने की आशीष प्राप्त करे। परमेश्वर की आशीष आपके साथ रहे!</description>
        <lastBuildDate>Thu, 08 Dec 2022 06:44:00 +0000</lastBuildDate>
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        <copyright>Copyright © 2003 by Hephzibah Publishing House</copyright>
        
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परमेश्वर की धार्मिकता पानी और आत्मा के सुसमाचार से है। फिर भी, मूल्यवान खजाने के जैसे उसे धार्मिक चेलों की नज़र से लम्बे समय से छूपा के रखा है। परिणाम के तौर पर, कई लोग परमेश्वर की धार्मिकता की जगह अपनी धार्मिकता पर निर्भर रहते है और अभिमान करते है। हालाँकि, मसीही सिध्धांत विश्वासियों के हृदय में मुख्य बात बने ऐसा नहीं लगता, जैसे की इस सिध्धांतो में परमेश्वर की धार्मिकता है।
पूर्वनिर्धारणा, न्याय और क्रमिक पवित्रता के सिध्धांत मसीहियत के मुख्य सिध्धांत है, जो विश्वासियों के जीवन में परेशानी और खालीपन भर देते है। लेकिन अब, मसीहियों को परमेश्वर को जानना चाहिए, उनकी धार्मिकता के बारे में सीखना चाहिए और निश्चित विश्वास में आगे बढ़ना चाहिए।
“हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना” आपको उत्तम समझ का आत्मा देगा और शांति की ओर आपको लेजर जाएगा। लेखक यह इच्छा रखते है की आप परमेश्वर की धार्मिकता को पहिचानने की आशीष प्राप्त करे। परमेश्वर की आशीष आपके साथ रहे!</itunes:subtitle>
        <itunes:author>The New Life Mission</itunes:author>
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परमेश्वर की धार्मिकता पानी और आत्मा के सुसमाचार से है। फिर भी, मूल्यवान खजाने के जैसे उसे धार्मिक चेलों की नज़र से लम्बे समय से छूपा के रखा है। परिणाम के तौर पर, कई लोग परमेश्वर की धार्मिकता की जगह अपनी धार्मिकता पर निर्भर रहते है और अभिमान करते है। हालाँकि, मसीही सिध्धांत विश्वासियों के हृदय में मुख्य बात बने ऐसा नहीं लगता, जैसे की इस सिध्धांतो में परमेश्वर की धार्मिकता है।
पूर्वनिर्धारणा, न्याय और क्रमिक पवित्रता के सिध्धांत मसीहियत के मुख्य सिध्धांत है, जो विश्वासियों के जीवन में परेशानी और खालीपन भर देते है। लेकिन अब, मसीहियों को परमेश्वर को जानना चाहिए, उनकी धार्मिकता के बारे में सीखना चाहिए और निश्चित विश्वास में आगे बढ़ना चाहिए।
“हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना” आपको उत्तम समझ का आत्मा देगा और शांति की ओर आपको लेजर जाएगा। लेखक यह इच्छा रखते है की आप परमेश्वर की धार्मिकता को पहिचानने की आशीष प्राप्त करे। परमेश्वर की आशीष आपके साथ रहे!</itunes:summary>
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            <itunes:name>The New Life Mission</itunes:name>
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                    <![CDATA[Ch1-1. रोमियों अध्याय १ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:44:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>“रोमियों को प्रेरित पौलुस की पत्री” को बाइबल के खजाने के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। यह मुख्य तौर पर इस बारे में बात करता है की कैसे कोई व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर पाए। रोमियों की तुलना याकूब के पत्री से करते हुए, वह व्यक्ति जिसने पहले को ‘खजाने के वचन’ और बाद को ‘भूसे के वचन’ के रूप में परिभाषित किया। हालाँकि, याकूब की पत्री भी परमेश्वर का वचन है जैसे रोमियों की पत्री है। अन्तर केवल इतना है की रोमियों की पत्री बहुमूल्य है क्योंकि यह बाइबल के बारे में विस्तृत विवरण देता है, जबकि याकूब की पत्री इसलिए बहुमूल्य है क्योंकि यह धर्मी जन को परमेश्वर की इच्छा से जीवित रहने के बारे में बताता है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[“रोमियों को प्रेरित पौलुस की पत्री” को बाइबल के खजाने के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। यह मुख्य तौर पर इस बारे में बात करता है की कैसे कोई व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर पाए। रोमियों की तुलना याकूब के पत्री से करते हुए, वह व्यक्ति जिसने पहले को ‘खजाने के वचन’ और बाद को ‘भूसे के वचन’ के रूप में परिभाषित किया। हालाँकि, याकूब की पत्री भी परमेश्वर का वचन है जैसे रोमियों की पत्री है। अन्तर केवल इतना है की रोमियों की पत्री बहुमूल्य है क्योंकि यह बाइबल के बारे में विस्तृत विवरण देता है, जबकि याकूब की पत्री इसलिए बहुमूल्य है क्योंकि यह धर्मी जन को परमेश्वर की इच्छा से जीवित रहने के बारे में बताता है।
 
https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
                </itunes:subtitle>
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                    <![CDATA[Ch1-1. रोमियों अध्याय १ का परिचय]]>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
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                    <![CDATA[Ch1-2. परमेश्वर की धार्मिकता जो सुसमाचार में प्रकट हुई (रोमियों १:१६-१७)]]>
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                                            <![CDATA[<p>प्रेरित पौलुस मसीह के सुसमाचार से लज्जित नहीं हुआ। उसने प्रभावशाली रूप से सुसमाचार की गवाही दी। हालाँकि, कई लोगों के रोने का एक कारण यह है कि वे अपने पापों के करण यीशु में विश्वास करते हैं। यह परमेश्वर की धार्मिकता को स्वीकार करने में उनकी अज्ञानता के कारण भी है। हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने और अपनी धार्मिकता को त्यागने के द्वारा बचाए जा सकते हैं।<br />प्रेरित पौलुस सुसमाचार से लज्जित क्यों नहीं हुआ? सबसे पहले, यह इसलिए था क्योंकि इसमें परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट हुई थी।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[प्रेरित पौलुस मसीह के सुसमाचार से लज्जित नहीं हुआ। उसने प्रभावशाली रूप से सुसमाचार की गवाही दी। हालाँकि, कई लोगों के रोने का एक कारण यह है कि वे अपने पापों के करण यीशु में विश्वास करते हैं। यह परमेश्वर की धार्मिकता को स्वीकार करने में उनकी अज्ञानता के कारण भी है। हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने और अपनी धार्मिकता को त्यागने के द्वारा बचाए जा सकते हैं।प्रेरित पौलुस सुसमाचार से लज्जित क्यों नहीं हुआ? सबसे पहले, यह इसलिए था क्योंकि इसमें परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट हुई थी।
 
https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
                </itunes:subtitle>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch1-3. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:43:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>धर्मी कैसे जीते हैं? विश्वास से। धर्मी विश्वास से जीते हैं। वास्तव में, ‘विश्वास’ शब्द बहुत आम है, लेकिन यह बाइबल का मूल है। धर्मी केवल विश्वास से ही जीते हैं। धर्मी कैसे जीते हैं? वे परमेश्वर पर अपने विश्वास से जीते हैं। मुझे आशा है कि हम इस भाग से प्रबुद्ध हो जाएंगे क्योंकि हमारे पास देह है और पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता हैं। हम बाइबल में छिपे वास्तविक अर्थों को नहीं जानते हुए, अपने स्वयं के विचारों से शास्त्रों की कई व्याख्या करते हैं, हालाँकि हम बाइबल को शाब्दिक रूप से समझ सकते हैं। हमारे पास एक साथ देह और आत्मा है। इसलिए, बाइबल कहती है कि हम, धर्मी, विश्वास से जीवित रहेंगे क्योंकि हमारे पास पापों की माफ़ी है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[धर्मी कैसे जीते हैं? विश्वास से। धर्मी विश्वास से जीते हैं। वास्तव में, ‘विश्वास’ शब्द बहुत आम है, लेकिन यह बाइबल का मूल है। धर्मी केवल विश्वास से ही जीते हैं। धर्मी कैसे जीते हैं? वे परमेश्वर पर अपने विश्वास से जीते हैं। मुझे आशा है कि हम इस भाग से प्रबुद्ध हो जाएंगे क्योंकि हमारे पास देह है और पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता हैं। हम बाइबल में छिपे वास्तविक अर्थों को नहीं जानते हुए, अपने स्वयं के विचारों से शास्त्रों की कई व्याख्या करते हैं, हालाँकि हम बाइबल को शाब्दिक रूप से समझ सकते हैं। हमारे पास एक साथ देह और आत्मा है। इसलिए, बाइबल कहती है कि हम, धर्मी, विश्वास से जीवित रहेंगे क्योंकि हमारे पास पापों की माफ़ी है।
 
https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
                </itunes:subtitle>
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                    <![CDATA[Ch1-3. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७)]]>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch1-4. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७-१८)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:42:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>ऐसा लिखा है, “धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।” क्या हम विश्वास से जीते हैं या नहीं? विश्वास ही केवल एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा धर्मी जीवनजो सकता है। विश्वास न्यायी को जीने देता है। जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं तो हम सब चीजों के साथ जी सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। केवल धर्मी जन विश्वास से जीते हैं। ‘केवल’ शब्द का अर्थ है कि धर्मी को छोड़कर कोई भी विश्वास से नहीं जी सकता। फिर पापियों के बारे में क्या? पापी विश्वास से नहीं जी सकते। क्या अब आप विश्वास से जीते हैं? हमें विश्वास से ही जीना चाहिए।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[ऐसा लिखा है, “धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।” क्या हम विश्वास से जीते हैं या नहीं? विश्वास ही केवल एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा धर्मी जीवनजो सकता है। विश्वास न्यायी को जीने देता है। जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं तो हम सब चीजों के साथ जी सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। केवल धर्मी जन विश्वास से जीते हैं। ‘केवल’ शब्द का अर्थ है कि धर्मी को छोड़कर कोई भी विश्वास से नहीं जी सकता। फिर पापियों के बारे में क्या? पापी विश्वास से नहीं जी सकते। क्या अब आप विश्वास से जीते हैं? हमें विश्वास से ही जीना चाहिए।
 
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                    <![CDATA[Ch1-4. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७-१८)]]>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch1-5. वे जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते है (रोमियों १:१८-२५)]]>
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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:42:00 +0000</pubDate>
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                                            <![CDATA[<p>हम देख सकते हैं कि प्रेरित पौलुस ने उसी सुसमाचार का प्रचार किया जिस सुसमाचार का हम प्रचार करते हैं। परमेश्वर का क्रोध किस पर प्रकट होता है? परमेश्वर का न्याय उन पापियों पर प्रकट होता है जो सत्य को अधार्मिकता में दबाते हैं, अर्थात् उनके लिए जो पाप करते हैं और अपने स्वयं के विचारों से सत्य को रोकते हैं।<br />प्रेरित पौलुस स्पष्ट रूप से कहता है कि परमेश्वर का क्रोध सबसे पहले उन लोगों पर प्रगट होता है, जो सत्य को अधार्मिकता से रोकते हैं। उनका न्याय परमेश्वर करेगा। परमेश्वर का क्रोध कैसा होगा? परमेश्वर का क्रोध उनकी देह और आत्माओं को नरक में डाल देगा।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[हम देख सकते हैं कि प्रेरित पौलुस ने उसी सुसमाचार का प्रचार किया जिस सुसमाचार का हम प्रचार करते हैं। परमेश्वर का क्रोध किस पर प्रकट होता है? परमेश्वर का न्याय उन पापियों पर प्रकट होता है जो सत्य को अधार्मिकता में दबाते हैं, अर्थात् उनके लिए जो पाप करते हैं और अपने स्वयं के विचारों से सत्य को रोकते हैं।प्रेरित पौलुस स्पष्ट रूप से कहता है कि परमेश्वर का क्रोध सबसे पहले उन लोगों पर प्रगट होता है, जो सत्य को अधार्मिकता से रोकते हैं। उनका न्याय परमेश्वर करेगा। परमेश्वर का क्रोध कैसा होगा? परमेश्वर का क्रोध उनकी देह और आत्माओं को नरक में डाल देगा।
 
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch2-1. रोमियों अध्याय २ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:41:00 +0000</pubDate>
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                                            <![CDATA[<p>इस संसार में, लोगों के केवल दो समूह हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं: यहूदी और मसीही। लोगों के इन दो समूहों में, पहला समूह यीशु पर विश्वास नहीं करता है जबकि दूसरा समूह विश्वास करता है। जो यीशु पर विश्वास नहीं करते उनके विश्वास को परमेश्वर बेकार मानता है। हालाँकि, सबसे गंभीर समस्या का सामना जो मसीही लोग कर रहे है वह यह है की वे किसी तरह से यीशु पर विश्वास तो करते है लेकिन अभी तक उनके पापों की माफ़ी नहीं मिली है। प्रेरित पौलुस इस विषय के बारे में रोमियों अध्याय २ में न केवल यहूदियों और यूनानियों से लेकिन आज के मसीहीयों से भी बात करता है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[इस संसार में, लोगों के केवल दो समूह हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं: यहूदी और मसीही। लोगों के इन दो समूहों में, पहला समूह यीशु पर विश्वास नहीं करता है जबकि दूसरा समूह विश्वास करता है। जो यीशु पर विश्वास नहीं करते उनके विश्वास को परमेश्वर बेकार मानता है। हालाँकि, सबसे गंभीर समस्या का सामना जो मसीही लोग कर रहे है वह यह है की वे किसी तरह से यीशु पर विश्वास तो करते है लेकिन अभी तक उनके पापों की माफ़ी नहीं मिली है। प्रेरित पौलुस इस विषय के बारे में रोमियों अध्याय २ में न केवल यहूदियों और यूनानियों से लेकिन आज के मसीहीयों से भी बात करता है।
 
https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
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                    <![CDATA[Ch2-1. रोमियों अध्याय २ का परिचय]]>
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                    <![CDATA[<p>इस संसार में, लोगों के केवल दो समूह हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं: यहूदी और मसीही। लोगों के इन दो समूहों में, पहला समूह यीशु पर विश्वास नहीं करता है जबकि दूसरा समूह विश्वास करता है। जो यीशु पर विश्वास नहीं करते उनके विश्वास को परमेश्वर बेकार मानता है। हालाँकि, सबसे गंभीर समस्या का सामना जो मसीही लोग कर रहे है वह यह है की वे किसी तरह से यीशु पर विश्वास तो करते है लेकिन अभी तक उनके पापों की माफ़ी नहीं मिली है। प्रेरित पौलुस इस विषय के बारे में रोमियों अध्याय २ में न केवल यहूदियों और यूनानियों से लेकिन आज के मसीहीयों से भी बात करता है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[इस संसार में, लोगों के केवल दो समूह हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं: यहूदी और मसीही। लोगों के इन दो समूहों में, पहला समूह यीशु पर विश्वास नहीं करता है जबकि दूसरा समूह विश्वास करता है। जो यीशु पर विश्वास नहीं करते उनके विश्वास को परमेश्वर बेकार मानता है। हालाँकि, सबसे गंभीर समस्या का सामना जो मसीही लोग कर रहे है वह यह है की वे किसी तरह से यीशु पर विश्वास तो करते है लेकिन अभी तक उनके पापों की माफ़ी नहीं मिली है। प्रेरित पौलुस इस विषय के बारे में रोमियों अध्याय २ में न केवल यहूदियों और यूनानियों से लेकिन आज के मसीहीयों से भी बात करता है।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch2-2. वे जो परमेश्वर के अनुग्रह को नकारते है (रोमियों २:१-१६)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:40:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>आइए हम व्यवस्था के बारे में बात करे। प्रेरित पौलुस ने व्यवस्था पर आधार रखनेवाले यहूदियों को कहा, “अंत: हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दुसरे पर दोष लगाता है उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिए की तू जो दोष लगाता है स्वयं ही वह काम करता है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है और आप वे ही काम करता है; क्या यह समझता है की तू परमेश्वर की दण्ड की आज्ञा से बच जाएगा?” (रोमियों २:१-३) विधि-सम्मत लोग सोचते है की वे ठीक रीति से परमेश्वर का आदर करते है। इस प्रकार के लोग अपने हृदय से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन अपने गलत घमंड के द्वारा विश्वास करते है जो उनके खुद के कर्मो पर आधारित है। ऐसे लोगों को दूसरों का न्याय करना अच्छा लगता है और वे इस कार्य में कुशल है। हालाँकि, जब वे परमेश्वर के वचन से दूसरों का न्याय करते है, तब उन्हें पता नहीं चलता है की वे भी ठीक उन लोगों की तरह ही है जिनकी टिका हो रही है आर वे भी ऐसी ही गलती कर रहे है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[आइए हम व्यवस्था के बारे में बात करे। प्रेरित पौलुस ने व्यवस्था पर आधार रखनेवाले यहूदियों को कहा, “अंत: हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दुसरे पर दोष लगाता है उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिए की तू जो दोष लगाता है स्वयं ही वह काम करता है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है और आप वे ही काम करता है; क्या यह समझता है की तू परमेश्वर की दण्ड की आज्ञा से बच जाएगा?” (रोमियों २:१-३) विधि-सम्मत लोग सोचते है की वे ठीक रीति से परमेश्वर का आदर करते है। इस प्रकार के लोग अपने हृदय से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन अपने गलत घमंड के द्वारा विश्वास करते है जो उनके खुद के कर्मो पर आधारित है। ऐसे लोगों को दूसरों का न्याय करना अच्छा लगता है और वे इस कार्य में कुशल है। हालाँकि, जब वे परमेश्वर के वचन से दूसरों का न्याय करते है, तब उन्हें पता नहीं चलता है की वे भी ठीक उन लोगों की तरह ही है जिनकी टिका हो रही है आर वे भी ऐसी ही गलती कर रहे है।
 
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                    <![CDATA[Ch2-2. वे जो परमेश्वर के अनुग्रह को नकारते है (रोमियों २:१-१६)]]>
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                    <![CDATA[<p>आइए हम व्यवस्था के बारे में बात करे। प्रेरित पौलुस ने व्यवस्था पर आधार रखनेवाले यहूदियों को कहा, “अंत: हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दुसरे पर दोष लगाता है उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिए की तू जो दोष लगाता है स्वयं ही वह काम करता है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है और आप वे ही काम करता है; क्या यह समझता है की तू परमेश्वर की दण्ड की आज्ञा से बच जाएगा?” (रोमियों २:१-३) विधि-सम्मत लोग सोचते है की वे ठीक रीति से परमेश्वर का आदर करते है। इस प्रकार के लोग अपने हृदय से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन अपने गलत घमंड के द्वारा विश्वास करते है जो उनके खुद के कर्मो पर आधारित है। ऐसे लोगों को दूसरों का न्याय करना अच्छा लगता है और वे इस कार्य में कुशल है। हालाँकि, जब वे परमेश्वर के वचन से दूसरों का न्याय करते है, तब उन्हें पता नहीं चलता है की वे भी ठीक उन लोगों की तरह ही है जिनकी टिका हो रही है आर वे भी ऐसी ही गलती कर रहे है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[आइए हम व्यवस्था के बारे में बात करे। प्रेरित पौलुस ने व्यवस्था पर आधार रखनेवाले यहूदियों को कहा, “अंत: हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दुसरे पर दोष लगाता है उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिए की तू जो दोष लगाता है स्वयं ही वह काम करता है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है और आप वे ही काम करता है; क्या यह समझता है की तू परमेश्वर की दण्ड की आज्ञा से बच जाएगा?” (रोमियों २:१-३) विधि-सम्मत लोग सोचते है की वे ठीक रीति से परमेश्वर का आदर करते है। इस प्रकार के लोग अपने हृदय से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन अपने गलत घमंड के द्वारा विश्वास करते है जो उनके खुद के कर्मो पर आधारित है। ऐसे लोगों को दूसरों का न्याय करना अच्छा लगता है और वे इस कार्य में कुशल है। हालाँकि, जब वे परमेश्वर के वचन से दूसरों का न्याय करते है, तब उन्हें पता नहीं चलता है की वे भी ठीक उन लोगों की तरह ही है जिनकी टिका हो रही है आर वे भी ऐसी ही गलती कर रहे है।
 
https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35 ]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch2-3. ख़तना वही है जो हृदय का है (रोमियों २:१७-२९)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:40:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>“खतना वही है जो हृदय का है।” जब हम हृदय से विश्वास करते हैं तो हम उद्धार प्राप्त करते है। हमें हृदय में उद्धार प्राप्त करना चाहिए। परमेश्वर कहते हैं, “और खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है, न कि लेख का: ऐसे की प्रशंसा मनुष्यों की ओर से नहीं, परन्तु परमेश्‍वर की ओर से होती है” (रोमियों २:२९)। हमारे हृदय में पापों की माफ़ी होनी चाहिए। यदि हमारे हृदय में पाप की माफ़ी नहीं है, तो यह अमान्य है। मनुष्य के पास एक “आंतरिक मनुष्य और एक बाहरी मनुष्य” है, और प्रत्येक को आंतरिक रूप से पाप की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[“खतना वही है जो हृदय का है।” जब हम हृदय से विश्वास करते हैं तो हम उद्धार प्राप्त करते है। हमें हृदय में उद्धार प्राप्त करना चाहिए। परमेश्वर कहते हैं, “और खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है, न कि लेख का: ऐसे की प्रशंसा मनुष्यों की ओर से नहीं, परन्तु परमेश्‍वर की ओर से होती है” (रोमियों २:२९)। हमारे हृदय में पापों की माफ़ी होनी चाहिए। यदि हमारे हृदय में पाप की माफ़ी नहीं है, तो यह अमान्य है। मनुष्य के पास एक “आंतरिक मनुष्य और एक बाहरी मनुष्य” है, और प्रत्येक को आंतरिक रूप से पाप की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए।
 
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                </itunes:subtitle>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                    <![CDATA[Ch3-1. रोमियों अध्याय ३ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:39:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>पौलुस ने कहा कि लोगों का अविश्वास परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को निष्प्रभावी नहीं बनाता। अध्याय २ से, प्रेरित पौलुस ने इस अध्याय में बताया कि अन्यजातियों पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं था। इस अध्याय में, पौलुस ने परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था के बारे में बात करने से पहले व्यवस्था और परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था की तुलना की, जो पापियों को उसकी धार्मिकता प्राप्त करने और उन्हें सच्चे जीवन की ओर ले जाने की अनुमति देती है। उन्होंने इस अध्याय में इस बात पर भी जोर दिया है कि पाप से उद्धार हमारे कार्यो के द्वारा नहीं है, लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास के द्वारा है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[पौलुस ने कहा कि लोगों का अविश्वास परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को निष्प्रभावी नहीं बनाता। अध्याय २ से, प्रेरित पौलुस ने इस अध्याय में बताया कि अन्यजातियों पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं था। इस अध्याय में, पौलुस ने परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था के बारे में बात करने से पहले व्यवस्था और परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था की तुलना की, जो पापियों को उसकी धार्मिकता प्राप्त करने और उन्हें सच्चे जीवन की ओर ले जाने की अनुमति देती है। उन्होंने इस अध्याय में इस बात पर भी जोर दिया है कि पाप से उद्धार हमारे कार्यो के द्वारा नहीं है, लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास के द्वारा है।
 
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                    <![CDATA[Ch3-1. रोमियों अध्याय ३ का परिचय]]>
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                    <![CDATA[<p>पौलुस ने कहा कि लोगों का अविश्वास परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को निष्प्रभावी नहीं बनाता। अध्याय २ से, प्रेरित पौलुस ने इस अध्याय में बताया कि अन्यजातियों पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं था। इस अध्याय में, पौलुस ने परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था के बारे में बात करने से पहले व्यवस्था और परमेश्वर की धार्मिकता की व्यवस्था की तुलना की, जो पापियों को उसकी धार्मिकता प्राप्त करने और उन्हें सच्चे जीवन की ओर ले जाने की अनुमति देती है। उन्होंने इस अध्याय में इस बात पर भी जोर दिया है कि पाप से उद्धार हमारे कार्यो के द्वारा नहीं है, लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास के द्वारा है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch3-2. केवल विश्वास के द्वारा पापों से उद्धार (रोमियों ३:१-३१)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:38:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>प्रेरित पौलुस कहता है कि व्यवस्था की पूर्ति और परमेश्वर के अनुग्रह का छुटकारा हमें हमारे कर्मो से नहीं, लेकिन विश्वास के द्वारा दिया गया है। हम अपने पापों से उद्धार पाते हैं और परमेश्वर के उद्धार के द्वारा धर्मी बन जाते हैं। “अत: यहूदी की क्या बड़ाई या खतने का क्या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उनको सौंपे गए। यदि कुछ विश्‍वासघाती निकले भी तो क्या हुआ? क्या उनके विश्‍वासघाती होने से परमेश्‍वर की सच्‍चाई व्यर्थ ठहरेगी? कदापि नहीं!” (रोमियों ३:१-४)।<br />यहूदी का लाभ यह है कि परमेश्वर का वचन उनके लिए प्रतिबद्ध था। वे अपने पूर्वजों से उसका वचन सुनते हुए जीवित रहे। क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें अपना वचन दिया था और यह उनके द्वारा दिया गया था, वे सोचते थे कि वे अन्यजातियों से बेहतर थे। हालाँकि, बाइबल कहती है कि परमेश्वर ने यहूदियों को छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने यीशु पर विश्वास नहीं किया जिसने उन्हें उनके पापों से छुड़ाया था।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[प्रेरित पौलुस कहता है कि व्यवस्था की पूर्ति और परमेश्वर के अनुग्रह का छुटकारा हमें हमारे कर्मो से नहीं, लेकिन विश्वास के द्वारा दिया गया है। हम अपने पापों से उद्धार पाते हैं और परमेश्वर के उद्धार के द्वारा धर्मी बन जाते हैं। “अत: यहूदी की क्या बड़ाई या खतने का क्या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उनको सौंपे गए। यदि कुछ विश्‍वासघाती निकले भी तो क्या हुआ? क्या उनके विश्‍वासघाती होने से परमेश्‍वर की सच्‍चाई व्यर्थ ठहरेगी? कदापि नहीं!” (रोमियों ३:१-४)।यहूदी का लाभ यह है कि परमेश्वर का वचन उनके लिए प्रतिबद्ध था। वे अपने पूर्वजों से उसका वचन सुनते हुए जीवित रहे। क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें अपना वचन दिया था और यह उनके द्वारा दिया गया था, वे सोचते थे कि वे अन्यजातियों से बेहतर थे। हालाँकि, बाइबल कहती है कि परमेश्वर ने यहूदियों को छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने यीशु पर विश्वास नहीं किया जिसने उन्हें उनके पापों से छुड़ाया था।
 
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                    <![CDATA[Ch3-2. केवल विश्वास के द्वारा पापों से उद्धार (रोमियों ३:१-३१)]]>
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                    <![CDATA[<p>प्रेरित पौलुस कहता है कि व्यवस्था की पूर्ति और परमेश्वर के अनुग्रह का छुटकारा हमें हमारे कर्मो से नहीं, लेकिन विश्वास के द्वारा दिया गया है। हम अपने पापों से उद्धार पाते हैं और परमेश्वर के उद्धार के द्वारा धर्मी बन जाते हैं। “अत: यहूदी की क्या बड़ाई या खतने का क्या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उनको सौंपे गए। यदि कुछ विश्‍वासघाती निकले भी तो क्या हुआ? क्या उनके विश्‍वासघाती होने से परमेश्‍वर की सच्‍चाई व्यर्थ ठहरेगी? कदापि नहीं!” (रोमियों ३:१-४)।<br />यहूदी का लाभ यह है कि परमेश्वर का वचन उनके लिए प्रतिबद्ध था। वे अपने पूर्वजों से उसका वचन सुनते हुए जीवित रहे। क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें अपना वचन दिया था और यह उनके द्वारा दिया गया था, वे सोचते थे कि वे अन्यजातियों से बेहतर थे। हालाँकि, बाइबल कहती है कि परमेश्वर ने यहूदियों को छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने यीशु पर विश्वास नहीं किया जिसने उन्हें उनके पापों से छुड़ाया था।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                    <![CDATA[Ch3-3. क्या आप प्रभु के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते है? (रोमियों ३:१०-३१)]]>
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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:38:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>रोमियों ३:१०-१२ कहता है, “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्वर का खोजनेवाला नहीं। सब भटक गए है, सब के सब निकम्मे बन गए है; कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।” हम सब परमेश्वर के सामने देह के कारण पाप से भरे हुए है। क्या कोई व्यक्ति खुद से देह के द्वारा धर्मी बन सकते है? क्या परमेश्वर के सामने कोई देह धर्मी है? मनुष्य देह से कभी भी धर्मी नहीं बन सकता। देह यीशु मसीह के द्वारा छूटकारा पाए बिना कभी भी धर्मी नहीं बन सकती।<br />जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, उनके पास अपने शरीर पर घमण्ड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हम जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, वे भी देह में भटग गए है और अच्छा करने की क्षमता नहीं रखते हैं। जब तब हम प्रभु की सेवा नहीं करते हैं और आत्मिक कार्य नहीं करते, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि हम अच्छे जीवन जीते हैं। जैसे यीशु ने कहा, “क्योंकि जो शारीर से जन्मा है वह शारीर है; और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है” (यूहन्ना ३:६), शरीर केवल अपनी वासना को संतुष्ट करना चाहता है जबकि आत्मा आत्मा के द्वारा चलने की इच्छा रखती है। देह को कभी भी आत्मा में नहीं बदला जा सकता।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[रोमियों ३:१०-१२ कहता है, “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्वर का खोजनेवाला नहीं। सब भटक गए है, सब के सब निकम्मे बन गए है; कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।” हम सब परमेश्वर के सामने देह के कारण पाप से भरे हुए है। क्या कोई व्यक्ति खुद से देह के द्वारा धर्मी बन सकते है? क्या परमेश्वर के सामने कोई देह धर्मी है? मनुष्य देह से कभी भी धर्मी नहीं बन सकता। देह यीशु मसीह के द्वारा छूटकारा पाए बिना कभी भी धर्मी नहीं बन सकती।जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, उनके पास अपने शरीर पर घमण्ड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हम जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, वे भी देह में भटग गए है और अच्छा करने की क्षमता नहीं रखते हैं। जब तब हम प्रभु की सेवा नहीं करते हैं और आत्मिक कार्य नहीं करते, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि हम अच्छे जीवन जीते हैं। जैसे यीशु ने कहा, “क्योंकि जो शारीर से जन्मा है वह शारीर है; और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है” (यूहन्ना ३:६), शरीर केवल अपनी वासना को संतुष्ट करना चाहता है जबकि आत्मा आत्मा के द्वारा चलने की इच्छा रखती है। देह को कभी भी आत्मा में नहीं बदला जा सकता।
 
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                </itunes:subtitle>
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                    <![CDATA[Ch3-3. क्या आप प्रभु के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते है? (रोमियों ३:१०-३१)]]>
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                    <![CDATA[<p>रोमियों ३:१०-१२ कहता है, “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्वर का खोजनेवाला नहीं। सब भटक गए है, सब के सब निकम्मे बन गए है; कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।” हम सब परमेश्वर के सामने देह के कारण पाप से भरे हुए है। क्या कोई व्यक्ति खुद से देह के द्वारा धर्मी बन सकते है? क्या परमेश्वर के सामने कोई देह धर्मी है? मनुष्य देह से कभी भी धर्मी नहीं बन सकता। देह यीशु मसीह के द्वारा छूटकारा पाए बिना कभी भी धर्मी नहीं बन सकती।<br />जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, उनके पास अपने शरीर पर घमण्ड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हम जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, वे भी देह में भटग गए है और अच्छा करने की क्षमता नहीं रखते हैं। जब तब हम प्रभु की सेवा नहीं करते हैं और आत्मिक कार्य नहीं करते, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि हम अच्छे जीवन जीते हैं। जैसे यीशु ने कहा, “क्योंकि जो शारीर से जन्मा है वह शारीर है; और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है” (यूहन्ना ३:६), शरीर केवल अपनी वासना को संतुष्ट करना चाहता है जबकि आत्मा आत्मा के द्वारा चलने की इच्छा रखती है। देह को कभी भी आत्मा में नहीं बदला जा सकता।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[रोमियों ३:१०-१२ कहता है, “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्वर का खोजनेवाला नहीं। सब भटक गए है, सब के सब निकम्मे बन गए है; कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।” हम सब परमेश्वर के सामने देह के कारण पाप से भरे हुए है। क्या कोई व्यक्ति खुद से देह के द्वारा धर्मी बन सकते है? क्या परमेश्वर के सामने कोई देह धर्मी है? मनुष्य देह से कभी भी धर्मी नहीं बन सकता। देह यीशु मसीह के द्वारा छूटकारा पाए बिना कभी भी धर्मी नहीं बन सकती।जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, उनके पास अपने शरीर पर घमण्ड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हम जिनके पाप मिटा दिए गए हैं, वे भी देह में भटग गए है और अच्छा करने की क्षमता नहीं रखते हैं। जब तब हम प्रभु की सेवा नहीं करते हैं और आत्मिक कार्य नहीं करते, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि हम अच्छे जीवन जीते हैं। जैसे यीशु ने कहा, “क्योंकि जो शारीर से जन्मा है वह शारीर है; और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है” (यूहन्ना ३:६), शरीर केवल अपनी वासना को संतुष्ट करना चाहता है जबकि आत्मा आत्मा के द्वारा चलने की इच्छा रखती है। देह को कभी भी आत्मा में नहीं बदला जा सकता।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
                </itunes:author>
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                    <item>
                <title>
                    <![CDATA[Ch4-1. रोमियों अध्याय ४ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:37:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                    https://permalink.castos.com/podcast/49494/episode/1342995</guid>
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                                <description>
                                            <![CDATA[<p>रोमियों ४:६-८ में पौलुस परमेश्वर के सामने धन्य लोगों के बारे में बात करता है। एक व्यक्ति जो वास्तव में परमेश्वर के सामने धन्य है, वह वो है जिसके अधर्म कामों कोमाफ़ किया गया हैं और जिनके पाप ढँक गए हैं। इसलिए पौलुस घोषणा करता है की, “धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:८)। <br />फिर पौलुस ने इब्राहम को एक धन्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। बाइबल में इब्राहम को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, पौलुस बताता हैं कि सच्चा और धन्य विश्वास क्या है। यदि इब्राहीम के अपने काम उसे धर्मी ठहराते तो उसके पास कुछ घमंड करने के लिए होता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। परमेश्वर की धार्मिकता जो उसने प्राप्त की वह केवल परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करने से ही संभव थी।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
                                    </description>
                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[रोमियों ४:६-८ में पौलुस परमेश्वर के सामने धन्य लोगों के बारे में बात करता है। एक व्यक्ति जो वास्तव में परमेश्वर के सामने धन्य है, वह वो है जिसके अधर्म कामों कोमाफ़ किया गया हैं और जिनके पाप ढँक गए हैं। इसलिए पौलुस घोषणा करता है की, “धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:८)। फिर पौलुस ने इब्राहम को एक धन्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। बाइबल में इब्राहम को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, पौलुस बताता हैं कि सच्चा और धन्य विश्वास क्या है। यदि इब्राहीम के अपने काम उसे धर्मी ठहराते तो उसके पास कुछ घमंड करने के लिए होता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। परमेश्वर की धार्मिकता जो उसने प्राप्त की वह केवल परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करने से ही संभव थी।
 
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                </itunes:subtitle>
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                    <![CDATA[Ch4-1. रोमियों अध्याय ४ का परिचय]]>
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                    <![CDATA[<p>रोमियों ४:६-८ में पौलुस परमेश्वर के सामने धन्य लोगों के बारे में बात करता है। एक व्यक्ति जो वास्तव में परमेश्वर के सामने धन्य है, वह वो है जिसके अधर्म कामों कोमाफ़ किया गया हैं और जिनके पाप ढँक गए हैं। इसलिए पौलुस घोषणा करता है की, “धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:८)। <br />फिर पौलुस ने इब्राहम को एक धन्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। बाइबल में इब्राहम को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, पौलुस बताता हैं कि सच्चा और धन्य विश्वास क्या है। यदि इब्राहीम के अपने काम उसे धर्मी ठहराते तो उसके पास कुछ घमंड करने के लिए होता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। परमेश्वर की धार्मिकता जो उसने प्राप्त की वह केवल परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करने से ही संभव थी।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[रोमियों ४:६-८ में पौलुस परमेश्वर के सामने धन्य लोगों के बारे में बात करता है। एक व्यक्ति जो वास्तव में परमेश्वर के सामने धन्य है, वह वो है जिसके अधर्म कामों कोमाफ़ किया गया हैं और जिनके पाप ढँक गए हैं। इसलिए पौलुस घोषणा करता है की, “धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:८)। फिर पौलुस ने इब्राहम को एक धन्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। बाइबल में इब्राहम को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, पौलुस बताता हैं कि सच्चा और धन्य विश्वास क्या है। यदि इब्राहीम के अपने काम उसे धर्मी ठहराते तो उसके पास कुछ घमंड करने के लिए होता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। परमेश्वर की धार्मिकता जो उसने प्राप्त की वह केवल परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करने से ही संभव थी।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch4-2. वे जिन्होंने विश्वास से स्वर्गीय आशीषों को पाया है (रोमियों ४:१-८)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:36:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>मैं इन दिनों कई आत्माओं को बचाने के लिए प्रभु को धन्यवाद देता हूं। बाइबल रोमियों अध्याय ४ में धन्य लोगों के बारे में बात करती है, इसलिए मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ जिन्हें आशीष दी गई है।<br />“जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: “धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:६-८)। बाइबल उन लोगों के बारे में बात करती है जो परमेश्वर के सामने धन्य है। वास्तव में धन्य वे है जिनके पाप परमेश्वर के सामने मिटा दी गए है और जिन्हें परमेश्वर पापी नहीं ठहराता।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[मैं इन दिनों कई आत्माओं को बचाने के लिए प्रभु को धन्यवाद देता हूं। बाइबल रोमियों अध्याय ४ में धन्य लोगों के बारे में बात करती है, इसलिए मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ जिन्हें आशीष दी गई है।“जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: “धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:६-८)। बाइबल उन लोगों के बारे में बात करती है जो परमेश्वर के सामने धन्य है। वास्तव में धन्य वे है जिनके पाप परमेश्वर के सामने मिटा दी गए है और जिन्हें परमेश्वर पापी नहीं ठहराता।
 
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                    <![CDATA[Ch4-2. वे जिन्होंने विश्वास से स्वर्गीय आशीषों को पाया है (रोमियों ४:१-८)]]>
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                    <![CDATA[<p>मैं इन दिनों कई आत्माओं को बचाने के लिए प्रभु को धन्यवाद देता हूं। बाइबल रोमियों अध्याय ४ में धन्य लोगों के बारे में बात करती है, इसलिए मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ जिन्हें आशीष दी गई है।<br />“जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: “धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:६-८)। बाइबल उन लोगों के बारे में बात करती है जो परमेश्वर के सामने धन्य है। वास्तव में धन्य वे है जिनके पाप परमेश्वर के सामने मिटा दी गए है और जिन्हें परमेश्वर पापी नहीं ठहराता।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[मैं इन दिनों कई आत्माओं को बचाने के लिए प्रभु को धन्यवाद देता हूं। बाइबल रोमियों अध्याय ४ में धन्य लोगों के बारे में बात करती है, इसलिए मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ जिन्हें आशीष दी गई है।“जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: “धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:६-८)। बाइबल उन लोगों के बारे में बात करती है जो परमेश्वर के सामने धन्य है। वास्तव में धन्य वे है जिनके पाप परमेश्वर के सामने मिटा दी गए है और जिन्हें परमेश्वर पापी नहीं ठहराता।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch5-1. रोमियों अध्याय ५ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:36:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>पौलुस इस अध्याय में विश्वास के द्वारा घोषणा करता है कि केवल वे ही जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं “परमेश्वर के साथ मेल रखते हैं।” इसका कारण यह है कि पिता परमेश्वर ने हमारे लिए मसीह को बपतिस्मा दिया और यहाँ तक कि क्रूस पर उसका लहू बहाया।<br />हालाँकि, हम अक्सर देखते हैं कि अधिकांश मसीही आज परमेश्वर के साथ शांति प्राप्त करने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता का ज़रा भी ज्ञान नहीं है। यह उन लोगों की सच्चाई है जो आज के मसीही धर्म को मानते हैं। इसलिए, न्यायीकरण का सिद्धांत परमेश्वर के सामने ठीक नहीं है।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[पौलुस इस अध्याय में विश्वास के द्वारा घोषणा करता है कि केवल वे ही जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं “परमेश्वर के साथ मेल रखते हैं।” इसका कारण यह है कि पिता परमेश्वर ने हमारे लिए मसीह को बपतिस्मा दिया और यहाँ तक कि क्रूस पर उसका लहू बहाया।हालाँकि, हम अक्सर देखते हैं कि अधिकांश मसीही आज परमेश्वर के साथ शांति प्राप्त करने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता का ज़रा भी ज्ञान नहीं है। यह उन लोगों की सच्चाई है जो आज के मसीही धर्म को मानते हैं। इसलिए, न्यायीकरण का सिद्धांत परमेश्वर के सामने ठीक नहीं है।
 
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                </itunes:subtitle>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[पौलुस इस अध्याय में विश्वास के द्वारा घोषणा करता है कि केवल वे ही जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं “परमेश्वर के साथ मेल रखते हैं।” इसका कारण यह है कि पिता परमेश्वर ने हमारे लिए मसीह को बपतिस्मा दिया और यहाँ तक कि क्रूस पर उसका लहू बहाया।हालाँकि, हम अक्सर देखते हैं कि अधिकांश मसीही आज परमेश्वर के साथ शांति प्राप्त करने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता का ज़रा भी ज्ञान नहीं है। यह उन लोगों की सच्चाई है जो आज के मसीही धर्म को मानते हैं। इसलिए, न्यायीकरण का सिद्धांत परमेश्वर के सामने ठीक नहीं है।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
                </itunes:author>
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                    <item>
                <title>
                    <![CDATA[Ch5-2. एक मनुष्य के द्वारा (रोमियों ५:१४)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:35:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                <description>
                                            <![CDATA[<p>आज मैं पाप की उत्पत्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ। आप ऐसा मत सोचिए की, “आप हर दिन एक ही तरह की बातें करते हो। मुझे अन्य चीजों के बारे में बताइए।” मैं चाहता हूँ कि आप ध्यान से सुनें। सुसमाचार सबसे कीमती चीज है। यदि कोई संत जिसके पापों को मिटा दिया गया है, वह हर दिन उसे याद दिलाने के लिए बार-बार सुसमाचार नहीं सुनता है, तो वह मर जाएगा। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार को सुने बिना कैसे जीवित रह सकता है? उसके जीने का एकमात्र तरीका सुसमाचार को सुनना है। आइए बाइबल खोलें और इसके वास्तविक अर्थों को साझा करें।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
                                    </description>
                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[आज मैं पाप की उत्पत्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ। आप ऐसा मत सोचिए की, “आप हर दिन एक ही तरह की बातें करते हो। मुझे अन्य चीजों के बारे में बताइए।” मैं चाहता हूँ कि आप ध्यान से सुनें। सुसमाचार सबसे कीमती चीज है। यदि कोई संत जिसके पापों को मिटा दिया गया है, वह हर दिन उसे याद दिलाने के लिए बार-बार सुसमाचार नहीं सुनता है, तो वह मर जाएगा। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार को सुने बिना कैसे जीवित रह सकता है? उसके जीने का एकमात्र तरीका सुसमाचार को सुनना है। आइए बाइबल खोलें और इसके वास्तविक अर्थों को साझा करें।
 
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                    <![CDATA[Ch5-2. एक मनुष्य के द्वारा (रोमियों ५:१४)]]>
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                    <![CDATA[<p>आज मैं पाप की उत्पत्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ। आप ऐसा मत सोचिए की, “आप हर दिन एक ही तरह की बातें करते हो। मुझे अन्य चीजों के बारे में बताइए।” मैं चाहता हूँ कि आप ध्यान से सुनें। सुसमाचार सबसे कीमती चीज है। यदि कोई संत जिसके पापों को मिटा दिया गया है, वह हर दिन उसे याद दिलाने के लिए बार-बार सुसमाचार नहीं सुनता है, तो वह मर जाएगा। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार को सुने बिना कैसे जीवित रह सकता है? उसके जीने का एकमात्र तरीका सुसमाचार को सुनना है। आइए बाइबल खोलें और इसके वास्तविक अर्थों को साझा करें।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[आज मैं पाप की उत्पत्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ। आप ऐसा मत सोचिए की, “आप हर दिन एक ही तरह की बातें करते हो। मुझे अन्य चीजों के बारे में बताइए।” मैं चाहता हूँ कि आप ध्यान से सुनें। सुसमाचार सबसे कीमती चीज है। यदि कोई संत जिसके पापों को मिटा दिया गया है, वह हर दिन उसे याद दिलाने के लिए बार-बार सुसमाचार नहीं सुनता है, तो वह मर जाएगा। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार को सुने बिना कैसे जीवित रह सकता है? उसके जीने का एकमात्र तरीका सुसमाचार को सुनना है। आइए बाइबल खोलें और इसके वास्तविक अर्थों को साझा करें।
 
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch6-1. रोमियों अध्याय ६ का परिचय]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:35:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                <description>
                                            <![CDATA[<p>क्या आप यूहन्ना द्वारा यीशु ने लिए हुए बपतिस्मा के रहस्य को जानते और विश्वास करते है? मई आपको रोमियों ६:१-४ के द्वारा इसके बारेमें बताना चाहता हूँ। “तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं! हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उसमें कैसे जीवन बिताएँ? क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया। अत: उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।”</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[क्या आप यूहन्ना द्वारा यीशु ने लिए हुए बपतिस्मा के रहस्य को जानते और विश्वास करते है? मई आपको रोमियों ६:१-४ के द्वारा इसके बारेमें बताना चाहता हूँ। “तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं! हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उसमें कैसे जीवन बिताएँ? क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया। अत: उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।”
 
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                    <![CDATA[Ch6-1. रोमियों अध्याय ६ का परिचय]]>
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<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch6-2. यीशु के बप्तिस्मा का सही मतलब (रोमियों ६:१-८)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:34:00 +0000</pubDate>
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                                            <![CDATA[<p>हम यूहन्ना को, जिसने यीशु को बपतिस्मा दिया, उसे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं। फिर बपतिस्मा का क्या अर्थ है? “बपतिस्मा” ग्रीक में “βάφτισμα” है। इसका अर्थ है, “डूबकी लगाना।” और बपतिस्मा का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ है “पाप और मृत्यु को दूर करना।”<br />“डूबकी लगाने” का अर्थ मृत्यु है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को बपतिस्मा दिया, तब जगत के सभी पाप यीशु के ऊपर स्थानांतरित हो गए, और इस प्रकार उसने उन सभी पापों को ले लिया और हमारे सभी पापों की मजदूरी का भुगतान करने के लिए क्रूस पर मर गया। यीशु हमारे स्थान पर मरा। मृत्यु का अर्थ पाप का परिणाम है क्योंकि “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                <itunes:subtitle>
                    <![CDATA[हम यूहन्ना को, जिसने यीशु को बपतिस्मा दिया, उसे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं। फिर बपतिस्मा का क्या अर्थ है? “बपतिस्मा” ग्रीक में “βάφτισμα” है। इसका अर्थ है, “डूबकी लगाना।” और बपतिस्मा का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ है “पाप और मृत्यु को दूर करना।”“डूबकी लगाने” का अर्थ मृत्यु है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को बपतिस्मा दिया, तब जगत के सभी पाप यीशु के ऊपर स्थानांतरित हो गए, और इस प्रकार उसने उन सभी पापों को ले लिया और हमारे सभी पापों की मजदूरी का भुगतान करने के लिए क्रूस पर मर गया। यीशु हमारे स्थान पर मरा। मृत्यु का अर्थ पाप का परिणाम है क्योंकि “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)।
 
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                </itunes:subtitle>
                                    <itunes:episodeType>full</itunes:episodeType>
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                    <![CDATA[<p>हम यूहन्ना को, जिसने यीशु को बपतिस्मा दिया, उसे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं। फिर बपतिस्मा का क्या अर्थ है? “बपतिस्मा” ग्रीक में “βάφτισμα” है। इसका अर्थ है, “डूबकी लगाना।” और बपतिस्मा का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ है “पाप और मृत्यु को दूर करना।”<br />“डूबकी लगाने” का अर्थ मृत्यु है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को बपतिस्मा दिया, तब जगत के सभी पाप यीशु के ऊपर स्थानांतरित हो गए, और इस प्रकार उसने उन सभी पापों को ले लिया और हमारे सभी पापों की मजदूरी का भुगतान करने के लिए क्रूस पर मर गया। यीशु हमारे स्थान पर मरा। मृत्यु का अर्थ पाप का परिणाम है क्योंकि “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[हम यूहन्ना को, जिसने यीशु को बपतिस्मा दिया, उसे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं। फिर बपतिस्मा का क्या अर्थ है? “बपतिस्मा” ग्रीक में “βάφτισμα” है। इसका अर्थ है, “डूबकी लगाना।” और बपतिस्मा का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ है “पाप और मृत्यु को दूर करना।”“डूबकी लगाने” का अर्थ मृत्यु है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु को बपतिस्मा दिया, तब जगत के सभी पाप यीशु के ऊपर स्थानांतरित हो गए, और इस प्रकार उसने उन सभी पापों को ले लिया और हमारे सभी पापों की मजदूरी का भुगतान करने के लिए क्रूस पर मर गया। यीशु हमारे स्थान पर मरा। मृत्यु का अर्थ पाप का परिणाम है क्योंकि “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)।
 
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                                                                            <itunes:duration>00:23:21</itunes:duration>
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                    <![CDATA[The New Life Mission]]>
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                <title>
                    <![CDATA[Ch6-3. अपने अंगो को धार्मिकता के हथियार के रूप में सोंपो (रोमियों ६:१२-१९)]]>
                </title>
                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 06:10:00 +0000</pubDate>
                <dc:creator>The New Life Mission</dc:creator>
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                                            <![CDATA[<p>प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि रोमियों अध्याय ६ में पापों से उद्धार पाने के बाद धर्मी को कैसे जीना चाहिए। वह यीशु के बपतिस्मा के साथ ‘विश्वास’ को फिर से स्पष्ट करता है। हमारे पापों को एक ही बार हमेशा के लिए बपतिस्मा, क्रूस और यीशु के पुनरुत्थान में विश्वास के द्वारा माफ़ कर दिया गया था।<br />हम यीशु के बपतिस्मा के बिना परमेश्वर की धार्मिकता और उद्धार से परिपूर्ण नहीं हो सकते। यदि यीशु ने बपतिस्मा लेते समय हमारे सभी पापों को दूर नहीं किया होता, तो हम पापों की माफ़ी प्राप्त करने के बाद यह नहीं कह सकते कि हम धर्मी हैं।</p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.bjnewlife.org/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.bjnewlife.org/ </a><br /><a href="https://youtube.com/@TheNewLifeMission" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://youtube.com/@TheNewLifeMission </a><br /><a href="https://www.facebook.com/shin.john.35" target="_blank" rel="noreferrer noopener">https://www.facebook.com/shin.john.35 </a></p>]]>
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                    <![CDATA[प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि रोमियों अध्याय ६ में पापों से उद्धार पाने के बाद धर्मी को कैसे जीना चाहिए। वह यीशु के बपतिस्मा के साथ ‘विश्वास’ को फिर से स्पष्ट करता है। हमारे पापों को एक ही बार हमेशा के लिए बपतिस्मा, क्रूस और यीशु के पुनरुत्थान में विश्वास के द्वारा माफ़ कर दिया गया था।हम यीशु के बपतिस्मा के बिना परमेश्वर की धार्मिकता और उद्धार से परिपूर्ण नहीं हो सकते। यदि यीशु ने बपतिस्मा लेते समय हमारे सभी पापों को दूर नहीं किया होता, तो हम पापों की माफ़ी प्राप्त करने के बाद यह नहीं कह सकते कि हम धर्मी हैं।
 
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                    <![CDATA[<p>प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि रोमियों अध्याय ६ में पापों से उद्धार पाने के बाद धर्मी को कैसे जीना चाहिए। वह यीशु के बपतिस्मा के साथ ‘विश्वास’ को फिर से स्पष्ट करता है। हमारे पापों को एक ही बार हमेशा के लिए बपतिस्मा, क्रूस और यीशु के पुनरुत्थान में विश्वास के द्वारा माफ़ कर दिया गया था।<br />हम यीशु के बपतिस्मा के बिना परमेश्वर की धार्मिकता और उद्धार से परिपूर्ण नहीं हो सकते। यदि यीशु ने बपतिस्मा लेते समय हमारे सभी पापों को दूर नहीं किया होता, तो हम पापों की माफ़ी प्राप्त करने के बाद यह नहीं कह सकते कि हम धर्मी हैं।</p>
<p> </p>
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                    <![CDATA[प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि रोमियों अध्याय ६ में पापों से उद्धार पाने के बाद धर्मी को कैसे जीना चाहिए। वह यीशु के बपतिस्मा के साथ ‘विश्वास’ को फिर से स्पष्ट करता है। हमारे पापों को एक ही बार हमेशा के लिए बपतिस्मा, क्रूस और यीशु के पुनरुत्थान में विश्वास के द्वारा माफ़ कर दिया गया था।हम यीशु के बपतिस्मा के बिना परमेश्वर की धार्मिकता और उद्धार से परिपूर्ण नहीं हो सकते। यदि यीशु ने बपतिस्मा लेते समय हमारे सभी पापों को दूर नहीं किया होता, तो हम पापों की माफ़ी प्राप्त करने के बाद यह नहीं कह सकते कि हम धर्मी हैं।
 
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